जंग के बीच कितना होता है समंदर में इंटरनेट वाली केबल टूटने का खतरा? जान लें इसकी ताकत और कमजोरी

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By news.saerio.com

जंग के बीच कितना होता है समंदर में इंटरनेट वाली केबल टूटने का खतरा? जान लें इसकी ताकत और कमजोरी


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Undersea Internet Cable: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध से इंटरनेट कनेक्टिविटी को भी खतरा हो सकता है. कुछ अनवेरिफाइड रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान ने लाल सागर में बिछी इंटरनेट केबल को डैमेज करने की धमकी दी है. हालांकि, ईरान की तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन फिर भी युद्ध में इन केबल को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है. आज हम जानेंगे कि करीब एक महीने से जारी इस जंग के बीच इंटरनेट केबल टूटने का कितना खतरा है और इन केबल की ताकत और कमजोरियां क्या-क्या हैं.

जंग में घिरा Internet Cable का नाजुक सिस्टम

जंग के इलाकों के बीच से गुजरने वाली इंटरनेट केबल्स इंटरनेट ट्रैफिक का एक बड़ा हिस्सा हैंडल करती हैं. इस समय जंग के मुख्य कारण बने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में कई जगह पर समुद्र की गहराई केवल 200 फीट है. इस गहराई पर बिछी इंटरनेट केबल्स को एक्सेस करना और डैमेज करना काफी आसान है. अगर गलती से भी ये डैमेज हो जाती हैं तो इसका नुकसान काफी ज्यादा हो जाएगा. इससे न सिर्फ इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित होगी, बल्कि युद्ध के चलते इन्हें रिपेयर करने में भी लंबा समय लग सकता है.

क्या इन केबल को पहले डैमेज किया गया है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024 में हूती गतिविधियों से जुड़े एक हमले में लाल सागर में बिछीं कई केबल डैमेज हो गई थी. इस कारण एशिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में इंटरनेट स्पीड धीमी हो गई थी. इन केबल की रिपेयरिंग में भी काफी समय लगा था. 

क्या हैं समुद्र में गुजरने वाली इन केबल्स की ताकत?

  • ये केबल्स सुनामी, मरीन एनिमल, वॉल्कैनो और शार्क अटैक का भी सुरक्षित तरीके से सामना कर सकती हैं.
  • इन्हें हाई बैंडविड्थ और लो लैटेंसी के लिए डिजाइन किया गया होता है. 
  • सैटेलाइट के मुकाबले डेटा ट्रांसमिशन के लिए ये काफी सस्ती होती हैं.
  • कॉपर और स्टील वायर के मुकाबले इनकी टेन्सिल स्ट्रेंग्थ ज्यादा होती है, जिससे इसे तोड़ना मुश्किल होता है. 
  • ये फ्लेक्सिबल और हल्की होती हैं और इनकी लाइफ करीब 25 साल होती है.

क्या हैं इनकी कमजोरियां?

  • जिन जगहों पर मडस्लाइड जैसी घटनाएं ज्यादा होती हैं, वहां ये कामयाब नहीं हैं.
  • इन्हें इंस्टॉल करना काफी मुश्किल और टाइम टेकिंग होता है. 
  • अगर डैमेज हो जाए तो रिपेयर करने में हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है. 
  • सिग्नल बूस्ट करने के लिए रेगुलर रिपीटर की जरूरत पड़ती है. 
  • जंग जैसे हालात में इन्हें जासूसी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

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