रिपोर्ट्स के अनुसार, इस टूलकिट को डार्कस्वॉर्ड नाम दिया गया है और इसका इस्तेमाल खास तौर पर टारगेटेड साइबर हमलों में किया गया था. यह हमला साधारण तरीके से नहीं होता बल्कि कई तकनीकी खामियों को एक साथ जोड़कर काम करता है. इसी वजह से इसे फुल-चेन एक्सप्लॉइट कहा जाता है जिसमें अलग-अलग कमजोरियों का फायदा उठाकर हैकर्स फोन के अंदर तक पहुंच जाते हैं.
यह पूरा अटैक Safari ब्राउज़र से शुरू होता है जहां वेबसाइट का कोड चलाने वाली सिस्टम लेयर को निशाना बनाया जाता है. इसके बाद यह धीरे-धीरे सिस्टम के दूसरे हिस्सों में प्रवेश करता हुआ ज्यादा अधिकार हासिल करता जाता है और अंत में फोन के कोर सिस्टम तक पहुंच जाता है. इस स्तर पर पहुंचने के बाद स्पाइवेयर को इंस्टॉल करना आसान हो जाता है और यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगती.
Published at : 21 Mar 2026 10:50 AM (IST)
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